ज़ाम आँखों से पिलाया था मुझे
आशिकाना भी बनाया था मुझे
प्यार तो मैंने निभाया था मगर
आपने ही आजमाया था मुझे
ख़्वाब पूरा जो नहीं होना कभी
ख़्वाब ऐसा क्यूँ दिखाया था मुझे
मैं मना कैसे भला करता तुम्हें
यूँ इशारों से बुलाया था मुझे
प्यार की बरसात तो मेरी रही
आपने तो बस जलाया था मुझे
जान लेनी थी तुम्हे ही तो कहो
दुश्मनों से क्यूँ बचाया था मुझे
इन्द्रपाल सिंह आगरावासी
आशिकाना भी बनाया था मुझे
प्यार तो मैंने निभाया था मगर
आपने ही आजमाया था मुझे
ख़्वाब पूरा जो नहीं होना कभी
ख़्वाब ऐसा क्यूँ दिखाया था मुझे
मैं मना कैसे भला करता तुम्हें
यूँ इशारों से बुलाया था मुझे
प्यार की बरसात तो मेरी रही
आपने तो बस जलाया था मुझे
जान लेनी थी तुम्हे ही तो कहो
दुश्मनों से क्यूँ बचाया था मुझे
इन्द्रपाल सिंह आगरावासी
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