😡 खूब निचोड़ो 😡
कविता का दूसरा भाग
🙏🙏
हंसने-रोने,चलने-फिरने,
पर इच्छा शुल्क लगाओ!
ये सांसें आती-जाती हैं,
इन पर सुविधाशुल्क बढ़ाओ!!
फूलों की खुशबू बहती हवा,
इनपे आवश्यकता शुल्क लगाओ!
खांसी छींक और खर्राटों पर,
आपात शुल्क बढ़ाओ!!
बच्चों की किलकारी पर,
बीबी की हुशियारी पर!
थोड़ा सा अधिभार बढ़ाओ!
निर्धन की आहों पर!
घायल के घावों पर!
थोड़ा सा प्रभार बढ़ाओ!!!
😡😡😡😡😡
परखके जनता जान सकी है,
कितने घटिया तुम निकले!"'''"'"
खूब निचोड़ो इस नीबू को,
जब तक इसमें रस निकले!!!
🙏🙏🙏
कवि आर.पी.सारंग
एटा (उत्तर प्रदेश)
कविता का दूसरा भाग
🙏🙏
हंसने-रोने,चलने-फिरने,
पर इच्छा शुल्क लगाओ!
ये सांसें आती-जाती हैं,
इन पर सुविधाशुल्क बढ़ाओ!!
फूलों की खुशबू बहती हवा,
इनपे आवश्यकता शुल्क लगाओ!
खांसी छींक और खर्राटों पर,
आपात शुल्क बढ़ाओ!!
बच्चों की किलकारी पर,
बीबी की हुशियारी पर!
थोड़ा सा अधिभार बढ़ाओ!
निर्धन की आहों पर!
घायल के घावों पर!
थोड़ा सा प्रभार बढ़ाओ!!!
😡😡😡😡😡
परखके जनता जान सकी है,
कितने घटिया तुम निकले!"'''"'"
खूब निचोड़ो इस नीबू को,
जब तक इसमें रस निकले!!!
🙏🙏🙏
कवि आर.पी.सारंग
एटा (उत्तर प्रदेश)
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