लिख भेजे हैं
अरमान कई
तुम पढ़ लेना
बैठकर तन्हा,
कुछ लम्हों में बीते हैं,
कुछ अश्कों में भीगे हैं,
कुछ सोचों में डूबे हैं,
कुछ यादों में उलझे हैं,
कुछ दिल से निकले हैं,
कुछ सीने में उतरे हैं,
कुछ जोर से पकड़े हैं,
कुछ आहें में उभरे हैं,
कुछ हिज्र में तड़पे हैं,
कुछ वस्ल में गुजरे हैं,
कुछ बूंद से बिखरे हैं,
कुछ ओस से नखरे हैं,
कुछ दर्द के टुकड़े हैं,
कुछ हंसते मुखड़े हैं,
कुछ प्यारे लगते हैं,
सागर के कत्तरे हैं।
✏ एस के सागर
अरमान कई
तुम पढ़ लेना
बैठकर तन्हा,
कुछ लम्हों में बीते हैं,
कुछ अश्कों में भीगे हैं,
कुछ सोचों में डूबे हैं,
कुछ यादों में उलझे हैं,
कुछ दिल से निकले हैं,
कुछ सीने में उतरे हैं,
कुछ जोर से पकड़े हैं,
कुछ आहें में उभरे हैं,
कुछ हिज्र में तड़पे हैं,
कुछ वस्ल में गुजरे हैं,
कुछ बूंद से बिखरे हैं,
कुछ ओस से नखरे हैं,
कुछ दर्द के टुकड़े हैं,
कुछ हंसते मुखड़े हैं,
कुछ प्यारे लगते हैं,
सागर के कत्तरे हैं।
✏ एस के सागर
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