हिंदी साहित्य का आधुनिक काल भारत के इतिहास के बदलते हुए स्वरूप से प्रभावित था। स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीयता की भावना का प्रभाव साहित्य में भी आया। भारत में औद्योगीकरण का प्रारंभ होने लगा था। आवागमन के साधनों का विकास हुआ। अंग्रेजी और पाश्चात्य शिक्षा का प्रभाव बढा और जीवन में बदलाव आने लगा।

Thursday, 29 March 2018

Kavi Nadeem jagdishpuri

तेरी यादों में उड़ करके कहीं बादल न हो जाऊ
रहूँ तेरी निगाओं में कहीं काजल न हो जाऊं
मुस्कराना छोड़ दो ऐसे कहीं फिर हाल ये न हो
देख लूँ ऐसे तुमको मैं फिर पागल न हो जाऊ
  Kavi Nadeem jagdishpuri
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Tuesday, 27 February 2018

डा कुमार विश्वास

मैं अपने गीत-ग़ज़लों से उसे पैग़ाम करता हूँ 
उसी की दी हुई दौलत उसी के नाम करता हूँ 
हवा का काम है चलना, दिए का काम है जलना 
वो अपना काम करती है, मैं अपना काम करता हूँ..."
(डा कुमार विश्वास)
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Tuesday, 20 February 2018

kavi Nadeem Jagdishpuri


दिल को लाचार कर लिया हमने
जिंदगी बहार कर लिया हमने
खफा है जमाना आज मुझसे
जो आपसे प्यार कर लिया हमने
किसको क्या मालूम क्या हुवा
यहाँ दिल को बाज़ार कर लिया हमने
लौट कर वापस न आये दोबारा
कितना इन्तजार कर लिया हमने
हाँ माना इश्क आग का दरिया है मगर
तैंर जाऊँगा ये करार कर लिया हमने
और कितना जलुंगा,जल चूका हूँ मैं
अब तो खुद को अंगार कर लिया हमने

kavi Nadeem Jagdishpuri
  8795124923

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Wednesday, 14 February 2018

Madhyam Saxena

दिल के सब जज़्बात जताने लगती है।
जब कोई लड़की शरमाने लगती है।।
याद तेरी इस हद तक आने लगती है।
तन्हाई तस्वीर बनाने लगती है।।
ख़्वाब में तेरा फूल सा चेहरा देखें तो।
आँखों तक से खुशबू आने लगती है।।
उसको मुझसे जब,कुछ कहना होता है।
चौखट पर कंगन खनकाने लगती है।।
हम दोनों में जब भी , झगड़ा होता है।
पायल तेरी धौंस जमाने लगती है।।
दिल को अपने डांट डपटकर रक्खें तो।
धड़कन कितना, शोर मचाने लगती है।।
{ Apki fav. gazal shukla ji}
Happy Valentine's day 
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Sunday, 11 February 2018

कवि नदीम जगदीशपुरी


कभी तेज कभी आहिस्ता हो जाता है
चीज ये बहुत सस्ता हो जाता है
पास नही होती दौलत जब भी यारों
नाजुक फिर सारा रिश्ता हो जाता है
  कवि नदीम जगदीशपुरी

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Wednesday, 7 February 2018

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Sunday, 31 December 2017

Happy new year with friends

मोहब्बत में क्या हाल होगा
मगर जाने कैसा काल होगा
गुजर गया जैसा भी जाने दो
मोहब्बत भरा अगला साल होगा

 कवि नदीम जगदीशपुरी
 8795124923
नव वर्ष की हार्दिक बधाई आप सभी को
  Happy New year

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Friday, 3 November 2017

Kavi Nadeem Jagdishpuri

कीमती हूँ मगर दाम नही मिलते
मोहब्बत के अब शाम नही मिलते
फायदा क्या है पढ़ लिखकर यारों
दिल्ली में एक भी काम नही मिलते

       कवि नदीम जगदीशपुरी



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Wednesday, 25 October 2017

dr kumar vishwash muktak

Collection of Kumar Vishwas Poetry and Muktak (कुमार विश्वास की कविता और मुक्तक का संग्रह)

Collection of Kumar Vishwas Poetry and Muktak
Kumar Vishwas

Collection of Kumar Vishwas Poetry and Muktak

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Thursday, 19 October 2017

रवीन्द्र सोनी 'रवि'

दीप पर्व की शुभ कामनाओं सहित......
मन का अंधेरा मिटे, जग का अंधेरा मिटे,
मिटे हर अंधेरा आज, अहले चमन से ।
रिद्धि-सिद्धि, लक्ष्मी-गणेश संग कुवेर जी हैं,
धूप-दीप-पुष्प दे, मना लो हर जतन से ।
अखिल ब्रम्हांण के लिए है यही दुआ 'रवि',
निर्धन,अमीर 'घर' भरे अन्न-धन से ।
'दीप पर्व' आया एक 'दीप' यूं जलाओ मत्रों,
मन का अंधेरा आज मिटे हर मन से ।
आपका
रवीन्द्र सोनी 'रवि'
जगदीशपुर अमेठी (उ०प्र०)
मो०-1-९६२८५४६७४६
2- ९४५१७८२२२८

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-दुर्गेश



समझ रही हो ना..
चली जो आ रही अब तक बदल हर रीत जाएगी।
हमेशा हारकर खुद से तू खुद को जीत जाएगी।
कोई इतना भला कैसे किसी को चाह सकता है,
यही बस सोचने में उम्र तेरी बीत जाएगी।
-दुर्गेश

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#शुभम



किसानों के लिए भी हो किसानी के लिए भी हो।
दिया एक कृष्ण की मीरा दीवानी के लिए भी हो।
जो तिल तिल जल रही है सरहदों पर देश की खातिर,
हमारा एक दीपक उस जवानी के लिए भी हो।
#शुभम

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happy diwali wishes by kavi Nadeem

अंधकार सब दूर करे वो, पाप मिटा देता है
हर पापी मिटता है जो इन्साफ मिटा देता है
लेते वीर जन्म धरा पर, बनकर एक सवाली
आई है दिवाली ...आई है दिवाली ......२
प्रेम भाव उत्पन्न हुवा ईष्या मन से दूर हुई
प्यार मोहब्बत की परिभाषा मन में फिर उत्तीर्ण हुई
मिलकर गाते लोग यहाँ पर, भजन और कवाली
आई है दिवाली ...आई है दिवाली ......२
घृणा का तुम त्याग करो और,प्रेम की बंशी बजाओ
दीप जलाकर घर घर में हर घर को यार सजाओ
प्रेम में पड़ जाएँ यारा सब गुंडे और मवाली
आई है दिवाली ...आई है दिवाली ......२

  कवि नदीम जगदीशपुरी
     8795124923






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Friday, 6 October 2017

Vinay Samadhiya

होत तमासौ देश में,
नेता करें वबाल
खुद तौ दीवारें फांदें,
लरकन कौ धरैं खयाल
लूट ड़कैती, सीनाकशी,
इनके हैं हथियार
ओढ़ सफेदी खद्दर की,
बनरए शेर, सियार
सत्य, अहिंसा मीठी वानी,
जिनकौ करें प्रचार
परवारे गुंडा बनें,
देत तमाचा य़ार
जनता के सेवक बने,
निर्बल के दातार
कोठा ज़िनमें नोट भरे,
चुखरा कर रए पार
लगौ अंगूठा श्याई कौ,
ना क ख ग कौ ग्यान्
बैठ खटोला उड़ करें,
तकनीकी संधान
भोर महेरी, दुफर दही,
ज़िनके थे पकवान
मिनरल वाटर सैं नभैं,
पियत तऊ कौं छांन
तभ्ईं देश कौ आज जौ,
फट्टा बैठौ य़ार ।
खा खा कैं मौटे परे,
लेतऊ नईं डकार ll
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शब्दार्थ=
परवारे =बाद में
कोठा=कमरा, भोर=सुबह, दुफर=दोपहर
महेरी- दही और आटा का दलिया,
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muzaffar parvaz

चार मिसरे अहबाब की ख़िदमत में हाज़िर है।
मज़दूर को ज़रा भी आराम तक न पहुँचें।
और उनकी महनतो का उन्हें दाम तक न पहुंचे।
यही चाहते हैं लीडर यही चाहते हैं अफ़सर।
कोई लाभ योजना का अब अवाम तक न पहुंचे।।
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